आग का इस्तेमाल #cavemen using fire for the 1st time ,#stoneage

 

                       आग का इस्तेमाल :-

नमस्ते दोस्तों!!

 स्वागत है आपका एक और नए अध्याय में

आज हमारे अध्याय का तीसरा दिन है ।
आज के अध्याय में हम आदिमानव द्वारा अग्नि के प्रयोग तथा अग्नि के घरेलू होने पर चर्चा करेंगे ।
आग‌‌ की खोज मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज है ।
यह संपूर्ण मानव जाति के भविष्य को आकार देने वाली घटना   थी ।
आग में इंसानों के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया तथा जीवन को एक नई दिशा दी ।
आज हम जिस सभ्यता में रहते हैं इसकी शुरुआत आग से ही मानी जाती है। 

आगे चलकर आग ने इंसान को कृषि करने के लिए प्रेरित 

किया था



 शुरुआत में मनुष्य प्राकृतिक आग (बिजली, जंगल की आग आदि,) का उपयोग करता था तथा उसे संग्रह करके रखता था।
कभी-कभी जब जंगल में आग लग जाती थी तो बहुत सारे जीव उसमें जल जाते थे और और इंसानों के लिए उसे जेल और पक्के मांस को खाना तथा पचाना आसान हो जाता था ।

धीरे-धीरे लगभग तीन लाख साल पहले आते-आते इंसानों ने आग को उत्पन्न करना तथा इसका नियमित प्रयोग करना सीख लिया  था । अब वह चकमक पत्थर का प्रयोग करके आग उत्पन्न कर सकते थे 

आज का प्रयोग इंसान ठंड से बचाव तथा मांस पकाने के लिए करता था अब मनुष्य के पास गर्माहट तथा रोशनी का एक भरोसेमंद संसाधन था इसका प्रयोग वह जंगली


जानवरों से बचाव के लिए भी करता था


अब एक सामान्य इंसान भी आज का प्रयोग करके पूरे जंगल को जला सकता है तथा जंगल के सभी जानवर को मार सकता है


 एक नियंत्रित आज बड़े जंगल को एक चारागाह में बदल सकती है तथा आग बुझाने पर वह जले हुए जानवर गुठलियों आदि एकत्रित कर सकता है अब उसके पास अन्य जानवरों के मुकाबले एक भरोसेमंद तथा शक्तिशाली साधन है जिसका प्रयोग वह आवश्यकता अनुसार कभी भी कर सकता है ।

अन्य जानवरों की ताकत उनके शरीर पर निर्भर करती है। लेकिन अब इंसान के पास अग्नि रूपी एक असीम शक्ति है।

आग का सबसे अच्छा प्रयोग खाना पकाने के रूप में किया जाने लगा गेहूं आलू आदि को पकाना तथा मांस जिसको कच्चे रूप में पचना बहुत मुश्किल होता था अब उसे पका कर आसानी से खाया तथा पचाया जा सकता है जहां खाने को पहचानने में 4 घंटे लगते थे अब वही 1 घंटे में हो जाता है ।



पहले जब इंसान ज्यादातर शिकार करके कच्चा मांस खाता था तब उसे समय उसके पास बड़े-बड़े दांत तथा बड़ी-बड़ी आतें हुआ करती थी बड़ी आंते भी मस्तिष्क की तरह ज्यादा ऊर्जा की खपत करती है तथा मस्तिष्क और आंतों को एक साथ धारण करना बहुत मुश्किल होता था।


अब इंसान पक्का कर खा सकता है इसलिए धीरे-धीरे (उत्परिवर्तन) उसके दांत तथा आतें पहले से छोटी होने लगी जिससे ऊर्जा की बचत हुई और इस ऊर्जा का उपयोग मस्तिष्क में होने लगा  जिस इंसान के दिमाग का विकास तेजी से होने लगा ।


इंसान अब अब विश्व मंच पर एक ताकतवर प्राणी के रूप में उभर रहे थे जो समूह में रहकर बड़े जानवरों का शिकार कर लेते थे तथा अग्नि का प्रयोग करके बड़े-बड़े जंगल भी जला देते थे और इसी तरह इंसान स्थिति की तंत्र के पिरामिड के शिखर पर जा पहुंचा ।





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